कलियुग
(राजकवि दादा लखमी चन्द जी)
समद ऋषि जी ज्ञानी
हो-गे जिसनै वेद विचारा ।
वेदव्यास जी कळूकाल
का हाल लिखण लागे सारा ॥ टेक ॥
एक बाप के नौ-नौ बेटे, ना पेट भरण पावैगा -
बीर-मरद हों
न्यारे-न्यारे, इसा बखत आवैगा ।
घर-घर में होंगे
पंचायती, कौन किसनै समझावैगा -
मनुष्य-मात्र का धर्म
छोड़-कै, धन जोड़ा चाहवैगा ।
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